ब्रिक्स:ब्रिक्स क्या है, गठन , सदस्य देश और ब्रिक्स का महत्व

ब्रिक्स:जिस समय अमेरिका विश्वभर में टैरिफ की तलवार चला रहा है, उसी दौरान भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है |इस लेख में ब्रिक्स क्या है, गठन, सदस्य देश, ब्रिक्स सम्मलेन तथा ब्रिक्स के महत्व के विषय पर चर्चा करेंगे |

ब्रिक्स क्या है-

ब्रिक्स:ब्रिक्स क्या है, गठन , सदस्य देश और ब्रिक्स का महत्व

एक संगठन के रूप में ब्रिक की स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी |ब्रिक के सदस्य देश-ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन |ब्रिक (BRIC) नाम पहली बार जिम ओ नील द्वारा वर्ष 2001 में लिखे गए शोधपत्र में प्रयुक्त किया गया |यहाँ माना गया कि वर्ष 2050 तक ब्रिक के चरों देशों की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी चार अर्थव्यवस्थाएं होंगी |ब्रिक के ये चार देश सम्पूर्ण विश्व के 25% भू-भाग तथा 40% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते है |ये चार देश सम्पूर्ण विश्व में सबसे बड़ी तथा सबसे तेज गति से विकसित होने वाले बाजार अर्थव्यवस्थाएं है |

ब्रिक देशों का प्रथम शिखर सम्मलेन 16 जून, 2009 को येकातरिनबर्ग (रूस) में हुआ |जिसमें सदस्य देशों के बीच वार्ता का मुख्य केंद्र वर्तमान वैश्विक आर्थिक संकट का मुकाबला करना तथा चारों देशों के बीच भविष्य में बेहतर तालमेल स्थापित करना था |संगठन का दूसरा शिखर सम्मलेन 15 अप्रैल, 2010 को ब्रासीलिया (ब्राजील) में हुआ |सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीकी, खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग तथा आधारभूत ढांचे के साथ-साथ ग्लोबल वार्मिंग के क्षेत्र में मिलकर कार्य करने की आवश्यकताओं पर बल दिया गया |

12-14 अप्रैल, 2011 को ब्रिक्स (BRICS) देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) का तीसरा शिखर सम्मलेन चीन के हैनान प्रांत के सान्या सिटी में सम्पन्न हुआ |दक्षिण अफ्रीका को औपचारिक रूप से इस समूह का सदस्य इस शिखर सम्मलेन में बनाया गया जिससे चारों देशों का ब्रिक (BRIC) अब पांच देशों के ब्रिक्स (BRICS) में रूपांतरित हो गया |सम्मलेन में हुए समझौते के अनुसार इन देशों ने सहमति दी कि वे अब डॉलर पर निर्भरता को कम करते हुए अपनी ही मुद्रा में एक-दूसरे देशों को कर्ज अथवा अनुदान देंगे |

ब्रिक्स का गठन-

जुलाई 2006 में BRIC (ब्राजील, रूस, भारत तथा चीन) देशों के नेता G8 आउटरीच शिखर सम्मलेन के दौरान पहली बार रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में मिले |सितम्बर 2006 में न्यूयार्क में इन देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक के दौरान औपचारिक रूप से BRIC संगठन घोषित हुआ |सितम्बर 2010 में दक्षिण अफ्रीका (पूर्ण सदस्य के रूप में) के इसमें शामिल होने के बाद यह BRICS कहलाया |मार्च 2011 में दक्षिण अफ्रीका ने पहली बार चीन के सान्या में तीसरे ब्रिक्स शिखर सम्मलेन में भाग लिया |

ब्रिक्स की संरचना-

ब्रिक्स कोई संगठन का रूप नहीं है |ब्रिक्स देशों के मंत्रिस्तरीय सम्मलेन प्रतिवर्ष आयोजित किये जाते है |ब्रिक्स शिखर सम्मलेन की अध्यक्षता प्रतिवर्ष B-R-I-C-S क्रमानुसार सदस्य देशों के सर्वोच्च नेता द्वारा की जाती है |

ब्रिक्स के सदस्य देश-

1-ब्राजील

2-रूस

3-इंडिया

4-चीन

5-दक्षिण अफ्रीका |

ब्रिक्स की उपलब्धियाँ और महत्व-

1-ब्रिक्स समूह का वैश्विक राजनीति तथा अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है |

2-ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था वैश्विक आर्थिक पैमाने पर महत्वपूर्ण है |

3-ब्रिक्स समूह सामाजिक तथा पर्यावरणीय सुधारों पर भी ध्यान केन्द्रित करता है |

4-ब्रिक्स देशों को चाहिये कि वे जल्द से जल्द क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी पर बनी सहमति को मूर्त रूप दें |यह 16 देशों (10 आसियान राष्ट्र तथा 6 एशिया-पैसिफिक देश) के बीच एक प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता है |इस पर सहमति मिलने के बाद न सिर्फ ब्रिक्स देशों के व्यापार को नयी दिशा मिलेगी, बल्कि कुशल श्रमिक तथा पेशेवरों को भी रोजगार के नए अवसर हासिल होंगे |

5-चौथी औद्योगिक क्रांति की चर्चा भी ब्रिक्स सम्मलेन की एक बड़ी उपलब्धि है |प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसकी चर्चा अपने भाषण में की थी |अगर ब्रिक्स देश इस दिशा में आगे बढ़ते है, तो ब्रिक्स देश आने वाले वर्षों में कई सारे बदलावों के गवाह बनेगें |

6-चौथी औद्योगिकी क्रांति में कौशल तथा डिजिटल विकास का लाभ सभी देशों को मिलेगा |इसका भारत को भी काफी फायदा मिल सकता है, क्योंकि भारत सॉफ्टवेयर सर्विस में तेजी से आगे बढ़ा है |हमारी कई सेवाएं अमेरिकी तथा पश्चिमी देशों को मिलती रही है |इसके साथ-साथ अब हम ब्रिक्स के दूसरे सदस्यों तथा विकासशील देशों के साथ भागीदारी कर आगे बढ़ सकते है |

7-ब्रिक्स सम्मलेन में आतंकवाद भी एक बड़ा मसला था जहाँ आतंकवाद के खिलाफ हरसंभव लड़ाई लड़ने पर भी सहमति बनी है |ज्ञातव्य है कि अभी तक चीन जैसे सदस्य देश पाकिस्तान की मदद देकर परोक्ष रूप से इस लड़ाई में अपनी भागीदारी नहीं निभा रहे है थे |मगर जिस तरह से अब बीजिंग पर आतंकी जमातों के हिमायती होने का आरोप लगने लगा है, इससे मौजूदा तस्वीर बदलने की उम्मीद बढ़ गयी है |

8-पिछले कुछ वर्षों में ब्रिक्स देशों का समूह दुनिया में एक बड़ी ताकत के रूप में उभरा है |इसमें शामिल देश दुनिया की 41% आबादी का प्रतिनिधित्व करते है |अगर अर्थव्यवस्था के हिसाब से देखें तो इन पांचो देशों की साझा अर्थव्यवस्था 40 लाख करोड़ डॉलर से भी ज्यादा है |इन देशों के पास साढ़े चार लाख करोड़ डॉलर का साझा निवेशी विदेशी मुद्रा भंडार है |यानी ब्रिक्स ऐसे ताकतवर समूह के रूप में मौजूद है जो अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के लिए चुनौती पेश कर रहा है जो एक बड़ी उपलब्धि है |

9-पिछले 10 वर्षों में उभरते बाजारों तथा विकाशसील देशों के बीच सहयोग के लिए ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है |ब्रिक्स के सदस्य देशों में एशिया, अफ्रीका, यूरोप तथा अमेरिका के महाद्वीप देश शामिल है |विश्व की जीडीपी का 22.53% हिस्सा ब्रिक्स देशों के पास है तथा विश्व का 18% व्यापार ब्रिक्स देश करते है |अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आकंड़ों के अनुसार विगत 10 वर्षों में ब्रिक्स देशों ने वैश्विक आर्थिक विकास में 50% हिस्सेदारी निभाई है |

10-ब्रिक्स ने अपने सदस्य देशों को अपनी-अपनी चिन्ताओं को साझा करने के लिए एक बड़ा मंच प्रदान किया है |दुनिया को बहुध्रुवीय बनाने के लिए भी यह मंच महत्वपूर्ण साबित हुआ है |एक वक्त था जब दुनिया में पश्चिमी देशों का सामरिक तथा आर्थिक क्षेत्रों में दबदबा था लेकिन अब विश्व बदल चुका है |चीन जहाँ आर्थिक तथा सैन्य दृष्टि से अमेरिका को चुनौती दे रहा है वहीँ रूस भी अपना पुराना गौरव हासिल करने में जुटा है |लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील भी उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बना चुका है |अफ़्रीकी महाद्वीप में दक्षिण अफ्रीका अत्यंत महत्वपूर्ण देश के रूप में उभरा है |

भारत और ब्रिक्स-

भारत वर्तमान समय में न केवल दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्था है बल्कि पूरा विश्व भारत को एक बड़ा बाजार तथा आने वाले समय में एक बड़ी ताकत के रूप में देख रहा है |भारत ने इस मंच से खुद को एक राजनीतिक इच्छा शक्ति और ताकतवर अर्थव्यवस्था वाले देश के तौर पर पहचान दिलाने में कामयाबी हासिल की है |भारत को सबसे बड़ी कामयाबी पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर घेराबंदी करने में मिली है |हॉल के वर्षों में सीमा विवाद के मुद्दे पर भारत और चीन के रिश्तों में खटास आयी है तथा पाकिस्तान इसका कई बार फायदा उठाने की कोशिश कर चुका है, लेकिन ब्रिक्स मंच के माध्यम से भारत ने चीन से आपस के तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में उठाया है तथा इनको हल करने की कोशिश की है |

न्यू डेवलपमेंट बैंक स्थापित करने के भारत के प्रस्ताव को ब्रिक्स ने स्वीकार किया जो भारत की बड़ी उपलब्धि को दर्शाता है |ये बैंक वैश्विक बैंकिंग संस्थाओं को चुनौती देने में अग्रणी भूमिका ऐडा कर रहा है |भारत अपने साथ-साथ ब्रिक्स देशों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हुआ है |भारत और ब्राजील के मध्य सूचना प्रोद्योगिकी, नैनो प्रोद्योगिकी, शिक्षा तथा द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्र में कई समझौते हुए है जिनका फायदा दोनों देशों को हुआ है |ब्रिक्स का नया सदस्य दक्षिण अफ्रीका भी भारत का प्रमुख वाणिज्यिक सहयोगी बनकर उभरा है |

दक्षिण एशिया में चीन तथा भारत की स्थिति महत्वपूर्ण है |दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है |रूस के साथ भारत के पुराने तथा गहरे रिश्ते रहे है |बदलते वैश्विक परिदृश्य में अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत और रूस के रिश्तों की मजबूती में कोई कमी नहीं आई है |

ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के पूरक है |भारत तथा चीन ऊर्जा के सबसे बड़े उपभोक्ता है, वहीँ रूस तथा ब्राजील ऊर्जा के सबसे बड़े उत्पादक देशों में है, जिसका लाभ भारत उठा सकता है |

ब्रिक्स के समक्ष समस्याएं-

1-आर्थिक मुद्दों को छोड़ दे तो ब्रिक्स देशों के बीच बड़े मतभेद है |भारत तथा चीन के बीच एक बड़ी प्रतिस्पर्धा है |इसके अलावा भविष्य में चीन तथा रूस में भी प्रतिस्पर्धा के आसार है |

2-भारत और चीन के बीच सीमा विवाद एक प्रमुख चुनौती है |

3-ब्रिक्स देश अपने-अपने क्षेत्र में अपने वर्चस्व के लिए लड़ रहे है जैसे एशिया में चीन तथा भारत; मध्य एशिया में रूस और चीन |

4-इतना ही नहीं अभी इन पांच देशों के बीच ब्रिक्स को औपचारिक शक्ल देने पर भी मतांतर है |मसलन ब्रिक्स का सैक्रेटेरिएट बनाने पर भी फिलहाल कोई सहमति नहीं हो पाई है |

5-इसके साथ ही इस विश्व पर भी कोई साफ विचार नहीं है कि समूह में नए सदस्यों को कैसे तथा कब जोड़ा जाये |

6-भारत, ब्राजील तथा दक्षिण अफ्रीका में मजबूत लोकतान्त्रिक व्यवस्था है तथा ये देश अमेरिका के साथ अपने नजदीकी संबंधों के लिए जाने जाते है |लेकिन इसी समूह में चीन भी है जहाँ साम्यवादी शासन है जहाँ गैर-कम्युनिस्ट राजनीतिक गतिविधियों के लिए सहनशीलता न के बराबर है |ऐसे में अलग-अलग राजनैतिक विचारधाराओं वाले देशों के बीच सामंजस्य बना रहना चुनौती है |

7-ब्राजील, चीन की मुद्रा युआन को जानबूझ कर सस्ता रखे जाने पर चिंता व्यक्त कर चुका है |जबकि चीन ये बात साफ़ कर चुका है कि युआन मुद्रा का मुद्दा ब्रिक्स में बहस के लिए नहीं उठाया जा सकता आदि |

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