चक्रवात:सामान्यतः चक्रवात कम वायु दाब के क्षेत्र को कहते है |इस कम वायु दाब के चारों ओर अधिक वायु भारी होती है |अधिक वायु दाब से कम वायु दाब की ओर पवन चलती है |इस लेख में चक्रवात क्या है, चक्रवात के प्रकार-उष्णकटिबंधीय तथा शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात के विषय में चर्चा करेंगे |

इस लेख में-
1-चक्रवात क्या है |
2-चक्रवात के प्रकार |
3-शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात |
4-शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात की विशेषताएं |
5-उष्णकटिबंधीय चक्रवात |
6-उष्णकटिबंधीय चक्रवात की विशेषताएं |
7-उष्ण कटिबंधीय और शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात में अंतर |
1-चक्रवात क्या है-
चक्रवात निम्न दाब का मौसमी तंत्र है |चक्रवात में केंद्र में निम्न दाब होता है तथा बाहर जाने पर इसमें वृद्धि होती है |अतः पवनें केंद्र की ओर प्रवाहित होती है |सामान्यतः चक्रवात कम वायु दाब के क्षेत्र को कहते है |इस कम वायु दाब के चारों ओर अधिक वायु भारी होती है |अधिक वायु दाब से कम वायु दाब की ओर पवन चलती है |उत्तरी गोलार्द्ध में चक्रवात में पवन की दिशा घड़ी की सुइयों के विपरीत होती है, जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में पवनों की दिशा घड़ी की सुइयों के अनुकूल होती है |
2-चक्रवात के प्रकार-
चक्रवातों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है-
A-शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात |
B-उष्णकटिबंधीय चक्रवात |
3-शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात-
इसे मध्य अक्षांशीय चक्रवात या इतर उष्णकटिबंधीय चक्रवात भी कहा जाता है |इसकी उत्पत्ति दोनों गोलार्द्ध में 30-35 अक्षांशों ले मध्य होती है |इसकी उत्पत्ति को स्पष्ट करने के लिए V. Bjerknes तथा उसके पुत्र Jacob Bjerknes (वी. बर्कनीज & जे. बर्कनीज) द्वारा ध्रुवीय वाताग्र सिद्धांत का प्रतिपादन किया गया है |इस सिद्धांत के अनुसार शीतोष्ण चक्रवात की उत्पत्ति दो विपरीत गुणों वाली वायुराशियों के अंतःक्रिया का परिणाम है |शीतोष्ण चक्रवात की जीवन अवधि 10-12 दिन होती है |शीतोष्ण चक्रवात की जीवन अवधि को 4 भागों में विभाजित किया जा सकता है |
A-प्रथम अवस्था-
इस अवस्था में ध्रुवीय वायुराशि तथा उष्णकटिबंधीय वायु राशि के अभिसरण के कारण ध्रुवीय वाताग्र का निर्माण होता है |प्रारंभ में वाताग्र स्थिर रहता है |अतः मौसम स्थिर रहता है |
B-द्वितीय अवस्था-
इसे नवजात अवस्था भी कहा जाता है |ठंडी वायुराशि शक्तिशाली होती है |जब यह गर्म वायुराशि के क्षेत्र में प्रवेश करती है तो वाताग्र मुड़ जाता है तथा उष्ण वाताग्र और शीत वाताग्र का निर्माण होता है |केंद्र में निम्न दाब का निर्माण होता है तथा पवन का चक्रीय प्रवाह प्रारम्भ हो जाता है |
C-तृतीय अवस्था-
ये परिपक्व (Mature) अवस्था है |शीत वाताग्र तेजी से आगे बढ़ता है |अतः उष्ण खंड संकुचित हो जाता है |इस अवस्था में चक्रवात की गहनता अधिकतम होती है |
D-चतुर्थ अवस्था-
इस अवस्था को संरोधावस्था कहा जाता है |इस अवस्था में शीत वाताग्र उष्ण वाताग्र से मिल जाता है |संरोधन के पूर्ण होने पर सम्पूर्ण गर्म वायुराशि ऊपर उठ जाती है |वाताग्र के नष्ट होने के कारण चक्रवात समाप्त हो जाता है |
⇨ शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात में मौसम का क्रम-
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चक्रवात के आगमन के पूर्व ही आकाश में पक्षाभ मेघ दिखने लगते है |चक्रवात के आगमन से वायुदाब कम हो जाता है |उष्ण वाताग्र के आगमन के कारण सामान्य या फुहारों के रूप में वर्षा होती है |वर्षा अपेक्षाकृत अधिक समय तक होती है |जब उष्ण खंड का आगमन होता है, तो वर्षा रुक जाती है तथा तापमान में वृद्धि होती है |जैसे-जैसे शीत वाताग्र निकट आता है, तापमान में कमी आती है |शीत वाताग्र के आने पर भारी वर्षा होती है |बादल गरजने और बिजली चमकने की घटनायें भी होती है |चक्रवात के गुजरने के बाद तापमान कम तथा वायुदाब बढ़ जाता है |
4-शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात की विशेषताएं-
1-शीतोष्ण चक्रवात की सम्भार रेखाएं लगभग अंडाकार होती है |
2-शीतोष्ण चक्रवात का विस्तार 1600 किलोमीटर चौड़ा हो सकता है |कभी-कभी एक ही चक्रवात पूरे यूरोप पर फैला हुआ होता है |
3-शीतोष्ण चक्रवात स्थिर हो सकते है तथा 900 से 1000 किलोमीटर प्रति दिन की गति से गतिमान हो सकते है |
4-शीतोष्ण चक्रवात की उत्पत्ति महासागरों के उन क्षेत्रों में होती है जहाँ उष्ण कटिबंधीय वायु शीत कटिबंधीय वायु से मिलती है |
5-शीतोष्ण चक्रवात की सामान्य दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में पश्चिम से पूर्व की ओर होती है |
6-प्रत्येक शीतोष्ण चक्रवात की गति भिन्न होती है, परंतु अधिकतर चक्रवात 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे के गति से आगे बढ़ते है |
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5-उष्णकटिबंधीय चक्रवात-
उष्ण चक्रवात की उत्पत्ति दोनों गोलार्द्ध में 5 से 30 अक्षांशों के मध्य होती है |8 से 24 अक्षांश के बीच इनकी संख्या और तीव्रता अधिक होती है |उष्ण चक्रवात के लिए निम्नलिखित परिस्थितियां आवश्यक है-
A-उच्च तापमान (T>27 डिग्री सेल्सियस)
B-उच्च आर्द्रता
C-कोरिआलिस बल
D-10 से 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर पवन का अभिसरण
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गुप्त ऊष्मा चक्रवात की ऊर्जा का स्रोत होती है |महासागरों पर आर्द्रता अधिक होती है |अतः उष्ण चक्रवात की उत्पत्ति गर्म सागरों पर होती है |उष्ण चक्रवात की उत्पत्ति महाद्वीप पर नहीं होती है, क्योंकि महाद्वीप पर आर्द्रता कम होती है |इसकी उत्पत्ति महाद्वीपों के पूर्वी तट पर होती है |उष्ण चक्रवात की उत्पत्ति पश्चिमी तट पर नहीं होती है, क्योंकि यह ठंडी जलधारायें प्रवाहित होती है |
उच्च तापमान तथा उच्च आर्द्रता के बावजूद इसकी उत्पत्ति विषुवतीय क्षेत्र में नहीं होती है, क्योंकि इस क्षेत्र में कोरिआलिस बल का अभाव होता है |अंतः उष्ण अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) उष्ण चक्रवात की उत्पत्ति के लिए अनुकूल होता है |अतः जब ITCZ 5 डिग्री उत्तर तथा दक्षिण अक्षांश के बाहर स्थानांतरित हो जाती है, तो पारिस्थितियां चक्रवात की उत्पत्ति के लिए अनुकूल हो जाती है |ITCZ में स्थानीय स्तर पर तापमान तथा वायुदाब में अंतर के कारण वायु के भवर की उत्पत्ति होती है जो अनुकूल परिस्थितियों में विकसित चक्रवात रूप ले लेता है |
उष्ण चक्रवात उत्तरी गोलार्द्ध में अधिक संख्या में उत्पन्न होते है और इस गोलार्द्ध में इनकी गहनता भी अधिक होती है |जिसके निम्न कारण है-
1-उत्तरी गोलार्द्ध में स्थल और जल का वितरण अधिक विषम है तथा उत्तरी गोलार्द्ध में आंशिक रूप से घिरे सागरों की संख्या अधिक है |
2-उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिणी गोलार्द्ध की तुलना सागर की सतह का तापमान अधिक होता है |
3-तापीय विषुवत रेखा (प्रत्येक देशांतर रेखा पर स्थित अधिकतम तापमान वाले स्थानों को मिलाने वकली काल्पनिक रेखा) और ITCZ मुख्यतः विषुवत रेखा के उत्तर में स्थित होते है |
संरचना-
1-प्रबल पवन परंतु वर्षा का अभाव |
2-अति प्रबल पवन तथा भारी वर्षा |
3-शांत वायुमंडल |
⇨ उष्णकटिबंधीय चक्रवात में मौसम का क्रम-
चक्रवात के आगमन के साथ ही वायुदाब नीचे गिर जाता है |पवन की गति बढ़ जाती है |आकाश बादलों से ढ़क जाता है |कपासी वर्षी मेघ के कारण दृश्यता का हो जाती है |बिजली की चमक के साथ मूसलाधार वर्षा होती है |चक्षु (EYE) के आगमन के साथ ही वर्षा रुक जाती है |लगभग एक घंटे के लिए वायुमंडल शांत रहता है |इसके बाद आकाश पुनः बादलों से ढ़क जाता तथा भारी वर्षा होती है |पवन की दिशा उलट जाती है और पवन की गति बढ़ जाती है |धीरे-धीरे आकाश स्वच्छ हो जाता है तथा पवन की गति कम हो जाती है |
6-उष्णकटिबंधीय चक्रवात की विशेषताएं-
1-वायु भार रेखाओं का आकार वृत्ताकार होता है |
2-उष्ण कटिबंधीय चक्रवात का व्यास 150 से 300 KM होता है |
3-चक्रवात के केंद्रीय भाग को चक्रवात की आंख कहते है|
4-इनमें वाताग्र नहीं होते है |
5-वाष्पीकरण के कारण इनमें भारी मात्रा में निहित ऊष्मा होती है |
6-इन चक्रवात की गति 50 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है |
7-उष्ण चक्रवात की उत्पत्ति पतझड़ के मौसम में होती है |
8-इनमें प्रमुख रूप से मुकुटधारी तथा काले बादल पाए जाते है, बादल छाये रहते है |
9-इन से मूसलाधार वर्षा होती है |इनको विनाशात्मक माना जाता है |
उष्ण चक्रवात को निम्न नामों से जाना जाता है-
1-चीन में टाईफून |
2-जापान में टेफु |
3-फिलीपींस में बेजियो |
4-कैरेबियन सागर में हरिकेन |
5-ऑस्ट्रेलिया में विली-विली |
6-बंगाल की खाड़ी, अरब सागर तथा हिन्द महासागर में-चक्रवात |
7-उष्णकटिबंधीय और शीतोष्णकटिबंधीय चक्रवात में अंतर-
1-उष्ण चक्रवात की उत्पत्ति 5 से 30 डिग्री अक्षांश के बीच दोनों गोलार्द्ध में होती है जबकि शीतोष्ण चक्रवात की उत्पत्ति 30 से 65 डिग्री अक्षांश के बीच दोनों गोलार्द्ध में होती है |
2-उष्ण चक्रवात की उत्पत्ति केवल महासागरों पर होती है जबकि शीतोष्ण चक्रवात की उत्पत्ति महाद्वीप तथा महासागरों दोनों पर होती है |
3-उष्ण चक्रवात ग्रीष्म ऋतू में मुख्यतः उत्पन्न होते है जबकि शीतोष्ण चक्रवात ग्रीष्म तथा शीत दोनों ऋतुओं में उत्पन्न होते है |परंतु गहनता शीत ऋतू में अधिक होती है |
4-उष्ण चक्रवात की दिशा सामान्यतः पूर्व से पश्चिम होती है जबकि शीतोष्ण चक्रवात की दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर गतिशील होती है |
5-उष्ण चक्रवात के संचरण का मार्ग परिवर्तनशील होता है जबकि शीतोष्ण चक्रवात का संचरण का मार्ग निश्चित होता है |इसे जंझा ट्रैक (Strong Track) कहा जाता है |
6-उष्ण चक्रवात का व्यास 150-800 किलोमीटर के बीच होता है जबकि शीतोष्ण चक्रवात का व्यास 300-1600 किलोमीटर के बीच होता है |
7-उष्ण चक्रवात में वायुदाब प्रवणता काफी तीव्र होती है |अतः वायु की गति काफी तीव्र (300 KM/H) होती है |जिसके कारण भारी नुकसान होता है |जबकि शीतोष्ण चक्रवात में वायुदाब प्रवणता अपेक्षाकृत कम होती है |अतः पवन की गति अपेक्षाकृत कम (80 KM/H) होती है |
8-चक्षु की उपस्थिति उष्ण चक्रवात की विशेषता है जबकि शीतोष्ण चक्रवात की विशेषता वाताग्र की उपस्थिति है |
9-उष्ण चक्रवात का प्रभाव तटीय क्षेत्र के मौसम तथा जलवायु पर होता है |जैसे-जैसे ये आंतरिक भाग की और गतिक होते है तो कमजोर होकर समाप्त हो जाते है जिसका कारण आर्द्रता का अभाव तथा घर्षण में वृद्धि |जबकि शीतोष्ण चक्रवात का प्रभाव वृहत क्षेत्र के मौसम तथा जलवायु पर होता है, जिसमें महाद्वीपों के आंतरिक भाग सम्मिलित है |
10-उष्ण चक्रवात के जीवन की अवधि 3-5 दिन होती है जबकि शीतोष्ण चक्रवात की अवधि 10-12 दिन होती है |
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